GST कैलकुलेटर
किसी भी दर पर GST सहित या GST रहित रकम निकालें (GST 2.0 स्लैब 5%, 18%, 40%, विशेष दरें 0.25%/3%, पुराने 12%/28%) या अपनी दर डालें।
कुल रकम (GST सहित)
English version: GST Calculator
GST क्या है?
GST (Goods and Services Tax) भारत की एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है, जो 1 जुलाई 2017 को लागू हुई। इसने सर्विस टैक्स, VAT, सेंट्रल एक्साइज, ऑक्ट्रॉय और एंट्री टैक्स जैसे कई केंद्रीय और राज्य करों की जगह ली। GST उपभोग पर लगने वाला कर है, जो बिक्री के समय वसूला जाता है और सरकार को जमा किया जाता है। भारत में दोहरी GST व्यवस्था है: एक ही राज्य के भीतर बिक्री पर केंद्र का CGST और राज्य का SGST लगता है, जबकि दो राज्यों के बीच बिक्री या आयात पर IGST लगता है।
22 सितंबर 2025 (GST 2.0) से भारत में दो मुख्य दरें हैं, 5% और 18%, साथ में लग्ज़री और सिन गुड्स के लिए 40%, ज़रूरी चीज़ों पर 0% और कुछ विशेष दरें जैसे 3% (सोना) और 0.25% (कच्चे हीरे)। पुराने 12% और 28% स्लैब इन्हीं में मिला दिए गए, सिर्फ तंबाकू पर फिलहाल 28% और सेस जारी है। चाहे आप बिज़नेस मालिक हों जो दाम तय कर रहे हैं, अकाउंटेंट हों जो रिटर्न भर रहे हैं, या ग्राहक हों जो बिल समझना चाहते हैं, यह GST कैलकुलेटर सारा हिसाब तुरंत कर देता है।
GST कैलकुलेटर का इस्तेमाल कैसे करें
- मोड चुनें — "GST जोड़ें" मूल रकम पर टैक्स जोड़कर कुल रकम बताता है। "GST हटाएँ" GST सहित कुल रकम में से मूल रकम अलग करता है।
- रकम डालें — जोड़ने वाले मोड में यह टैक्स से पहले की मूल रकम है। हटाने वाले मोड में यह GST सहित कुल रकम है।
- GST दर चुनें — GST 2.0 की दरें: 0% (ज़रूरी चीज़ें), 5% (रोज़मर्रा की ज़रूरतें, ज़्यादातर प्रोसेस्ड फूड), 18% (ज़्यादातर सामान और सेवाएँ, स्टैंडर्ड दर, कंप्यूटर और फोन सहित), 40% (लग्ज़री/सिन गुड्स), और विशेष दरें 0.25% व 3%। पुराने 12% और 28% स्लैब 22 सितंबर 2025 से पहले के बिलों और तंबाकू के लिए रखे गए हैं। चाहें तो अपनी दर भी डाल सकते हैं।
- नतीजा देखें — कुल (या मूल) रकम, GST रकम और CGST/SGST का बँटवारा। राज्य के भीतर की ज़्यादातर खरीद में GST आधा-आधा CGST और SGST में बँटता है।
- बिल में इस्तेमाल करें — CGST और SGST की रकम अपने इनवॉइस में लिखें। GST कानून के अनुसार इन्हें अलग-अलग दिखाना ज़रूरी है।
GST का फॉर्मूला और बँटवारा
GST जोड़ना: कुल रकम = मूल रकम + (मूल रकम × GST% / 100)
GST हटाना: मूल रकम = कुल रकम / (1 + GST% / 100)
GST बँटवारे के नियम:
- राज्य के भीतर बिक्री (खरीदार और विक्रेता एक ही राज्य में): टैक्स बराबर CGST + SGST में बँटता है। उदाहरण: 18% GST = 9% CGST + 9% SGST।
- दो राज्यों के बीच बिक्री या निर्यात/आयात: पूरा टैक्स IGST के रूप में लगता है, जो केंद्र सरकार को जाता है और बाद में राज्यों में बँटता है।
उदाहरण: मुंबई में ₹1,000 की सेवा, मुंबई के ही ग्राहक को, 18% GST पर:
- CGST = 1,000 × 9% = ₹90
- SGST = 1,000 × 9% = ₹90
- कुल GST = ₹180
- बिल की कुल रकम = ₹1,180
यही सेवा बेंगलुरु के ग्राहक को दी जाए तो पूरे ₹180 IGST के रूप में लगेंगे, बिल की कुल रकम फिर भी ₹1,180 ही रहेगी।
उदाहरण
- रेस्टोरेंट बिल, ₹1,000 खाना, 5% GST: CGST ₹25 + SGST ₹25 = कुल ₹1,050
- SaaS सब्सक्रिप्शन, ₹5,000, 18% GST: CGST ₹450 + SGST ₹450 (या दूसरे राज्य में IGST ₹900) = कुल ₹5,900
- छोटी कार, ₹8 लाख, 18% GST: CGST ₹72,000 + SGST ₹72,000 = कुल ₹9.44 लाख (बड़ी कारों पर अब 40% GST है, कंपेन्सेशन सेस नहीं)
- उल्टा हिसाब: होटल बिल ₹11,800 में 18% GST शामिल है। मूल रकम = 11,800 / 1.18 = ₹10,000। GST = ₹1,800।
- सोने की ज्वेलरी, ₹50,000, 3% GST: CGST ₹750 + SGST ₹750 = कुल ₹51,500
GST से जुड़े ज़रूरी टिप्स
- हमेशा GST-मान्य इनवॉइस बनाएँ जिसमें CGST, SGST, IGST अलग-अलग दिखें, यह कानूनन ज़रूरी है।
- सालाना टर्नओवर ₹20 लाख (सेवाएँ) या ₹40 लाख (सामान) से ज़्यादा हो तो GST रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
- ₹1.5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले छोटे बिज़नेस कंपोज़िशन स्कीम ले सकते हैं, इसमें दरें कम (1-6%) हैं लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के सभी बिल कम से कम 6 साल संभालकर रखें, GST ऑडिट इतने पीछे तक जा सकता है।
- दूसरे राज्य में बिक्री पर IGST लगाएँ (CGST/SGST नहीं), खरीदार अपने राज्य में इसका क्रेडिट लेता है।
- एडवांस पेमेंट पर GST उसी अवधि में भरना होता है जिसमें पैसा मिला, भले ही सामान या सेवा बाद में दी जाए।
- ₹50,000 से ज़्यादा के सामान को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के लिए ई-वे बिल ज़रूरी है, इसे ewaybill.nic.in पर बनाएँ।
सीमाएँ और ध्यान देने योग्य बातें
GST दरें समय-समय पर बदलती हैं, यह कैलकुलेटर 2026 की मौजूदा दरें इस्तेमाल करता है। कंपोज़िशन स्कीम, रिवर्स चार्ज मैकेनिज़्म और कुछ सेवाओं के प्लेस-ऑफ-सप्लाई नियमों में अलग व्यवहार हो सकता है, जो यहाँ शामिल नहीं है। बिज़नेस फाइलिंग के लिए हमेशा चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें या gst.gov.in देखें। कुछ चीज़ों पर GST कंपेन्सेशन सेस भी लगता है (जैसे तंबाकू), जो ऊपर की स्टैंडर्ड दरों में शामिल नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में अभी GST की दरें क्या हैं?
22 सितंबर 2025 (GST 2.0) से भारत में शून्य के अलावा 3 मुख्य स्लैब हैं: 0% (ज़रूरी खाद्य पदार्थ, स्वास्थ्य, शिक्षा), 5% (घरेलू ज़रूरतें, ज़्यादातर प्रोसेस्ड फूड, परिवहन), 18% (ज़्यादातर सामान और सेवाएँ, मोबाइल, कंप्यूटर और छोटी कारें सहित, स्टैंडर्ड दर) और 40% (लग्ज़री और सिन गुड्स, बड़ी कारें, एरेटेड और कैफीन वाले पेय)। पुराने 12% और 28% स्लैब इन्हीं में मिला दिए गए; तंबाकू पर फिलहाल 28% और सेस है। कुछ चीज़ों की विशेष दरें हैं (सोना 3%, कच्चे हीरे 0.25%)।
CGST, SGST और IGST में क्या अंतर है?
एक ही राज्य के भीतर बिक्री पर GST, CGST (केंद्र का हिस्सा) और SGST (राज्य का हिस्सा) में आम तौर पर आधा-आधा बँटता है। दो राज्यों के बीच या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर पूरी रकम IGST के रूप में लगती है, जिसे केंद्र सरकार बाद में राज्यों को बाँटती है। ग्राहक के लिए कुल टैक्स एक जैसा रहता है, सिर्फ टैक्स लेने वाली सरकार बदलती है।
मेरे प्रोडक्ट पर कौन सी GST दर लगेगी, कैसे पता करें?
सामान के लिए GST दरें HSN कोड और सेवाओं के लिए SAC कोड से तय होती हैं। cbic-gst.gov.in पर आधिकारिक रेट फाइंडर देखें या अपने CA से पूछें। आम दरें: ज़्यादातर सॉफ्टवेयर/SaaS 18%, रेस्टोरेंट का खाना 5%, पैक्ड अनाज 5%, छोटी कारें 18%, बड़ी कारें 40%, ₹2,500 तक के कपड़े 5%।
क्या MRP में GST शामिल होता है?
हाँ, MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) ग्राहक के लिए सभी करों सहित कीमत है और इसमें GST पहले से शामिल है। MRP से ज़्यादा लेना कानूनन मना है। अगर कोई दुकानदार MRP के ऊपर GST जोड़ता है तो यह गैरकानूनी है और आप उपभोक्ता अदालत में शिकायत कर सकते हैं।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या है?
ITC वह GST है जो आपने खरीद पर चुकाया और जिसे आप बिक्री पर वसूले गए GST में से घटा सकते हैं। उदाहरण: कच्चे माल पर ₹1,800 GST दिया और बिक्री पर ₹3,000 GST वसूला, तो सरकार को सिर्फ ₹1,200 (3,000 - 1,800) जमा करने होंगे। ITC ही वह व्यवस्था है जो टैक्स पर टैक्स लगने से रोकती है।
क्या छोटे बिज़नेस को GST रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है?
सालाना टर्नओवर ₹40 लाख (सामान) / ₹20 लाख (सेवाएँ) / ₹10 लाख (विशेष श्रेणी वाले राज्य) से ज़्यादा हो तो रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। दूसरे राज्यों में बेचने वाले, ई-कॉमर्स विक्रेता और कुछ प्रोफेशनल्स के लिए टर्नओवर चाहे जितना हो, रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। सीमा से कम होने पर भी स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है, जो B2B विक्रेताओं के लिए फायदेमंद हो सकता है।
आयात पर GST कैसे लगता है?
आयातित सामान पर पहले बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) लगती है, फिर कस्टम ड्यूटी सहित मूल्य पर IGST। उदाहरण: ₹100 का आयातित सामान + 10% BCD = ₹110; फिर ₹110 पर 18% IGST = ₹19.80। कुल लागत = ₹129.80 (शिपिंग और इंश्योरेंस अलग, जो मूल्य में जुड़ते हैं)।
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