इनकम टैक्स कैलकुलेटर (भारत)

FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए इनकम टैक्स निकालें। पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की साथ-साथ तुलना करें।

पुरानी व्यवस्था की कटौतियाँ (वैकल्पिक)

टैक्स तुलना

नई व्यवस्था
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पुरानी व्यवस्था
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सुझाव
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आपकी बचत
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English version: Income Tax Calculator (India)

इनकम टैक्स कैलकुलेटर क्या है?

यह इनकम टैक्स कैलकुलेटर बताता है कि FY 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) में भारत में आपको कितना इनकम टैक्स देना होगा। यह दोनों टैक्स व्यवस्थाओं की साथ-साथ तुलना करता है: नई व्यवस्था (2023-24 से ज़्यादातर करदाताओं के लिए डिफ़ॉल्ट, कम स्लैब दरें लेकिन कटौतियाँ बहुत कम) और पुरानी व्यवस्था (ऊँची स्लैब दरें लेकिन 80C, HRA, होम लोन ब्याज जैसी कटौतियों की सुविधा)।

कैलकुलेटर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़कर सटीक टैक्स निकालता है, सेक्शन 87A की छूट लगाता है (नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ज़ीरो टैक्स, यानी स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद लगभग ₹12.75 लाख तक की सैलरी, और इसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ; पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक), ₹50 लाख से ऊपर मार्जिनल रिलीफ के साथ सरचार्ज जोड़ता है, और बताता है कि आपकी स्थिति में कौन सी व्यवस्था ज़्यादा पैसा बचाती है।

इस टूल का इस्तेमाल कैसे करें

  1. सालाना कुल आय डालें — पूरी सालाना सैलरी और दूसरी आय (ब्याज, किराया आदि)। बोनस और भत्ते भी जोड़ें, यानी कटौतियों से पहले की पूरी रकम।
  2. आयु वर्ग चुनें — 60 से कम, 60-80 (वरिष्ठ नागरिक) या 80 से ऊपर (अति वरिष्ठ)। पुरानी व्यवस्था में बुज़ुर्गों की बेसिक छूट सीमा ज़्यादा होती है।
  3. पुरानी व्यवस्था की कटौतियाँ डालें — 80C (PPF, LIC, ELSS, अधिकतम ₹1.5 लाख), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस, अधिकतम ₹1 लाख), HRA छूट, होम लोन ब्याज (सेक्शन 24, अधिकतम ₹2 लाख), NPS 80CCD(1B) अधिकतम ₹50 हज़ार, और दान या 80E जैसी अन्य कटौतियाँ।
  4. तुलना देखें — दोनों व्यवस्थाओं का टैक्स साथ-साथ दिखता है। "सुझाव" बताता है कि कौन सी सस्ती है और "आपकी बचत" दोनों का अंतर दिखाती है।
  5. ITR भरते समय व्यवस्था चुनें — TDS के लिए अपने एम्प्लॉयर को पसंदीदा व्यवस्था बताएँ और ITR भरते समय उसे फिर चुनें। सैलरीड लोग हर साल व्यवस्था बदल सकते हैं।

FY 2025-26 के टैक्स स्लैब

नई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट, स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा कोई कटौती नहीं):

  • ₹4 लाख तक: 0%
  • ₹4-8 लाख: 5%
  • ₹8-12 लाख: 10%
  • ₹12-16 लाख: 15%
  • ₹16-20 लाख: 20%
  • ₹20-24 लाख: 25%
  • ₹24 लाख से ऊपर: 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000
  • सेक्शन 87A छूट: ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ज़ीरो टैक्स (इसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ)

पुरानी व्यवस्था (कटौतियों के साथ):

  • ₹2.5 लाख तक: 0% (60 से कम), ₹3 लाख (60-80), ₹5 लाख (80 से ऊपर)
  • ₹2.5-5 लाख: 5%
  • ₹5-10 लाख: 20%
  • ₹10 लाख से ऊपर: 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹50,000
  • सेक्शन 87A: ₹5 लाख तक की आय पर ज़ीरो टैक्स
  • साथ में 80C, 80D, HRA, होम लोन, NPS की कटौतियाँ

दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस अलग से लगता है।

उदाहरण

  • ₹10 लाख आय, कोई कटौती नहीं: नई व्यवस्था: ₹0 (87A छूट)। पुरानी व्यवस्था: ~₹1.07 लाख। नई व्यवस्था ~₹1.07 लाख से जीतती है।
  • ₹15 लाख आय, ₹3 लाख कटौती: नई व्यवस्था: ~₹97.5 हज़ार। पुरानी व्यवस्था: ~₹1.64 लाख। नई व्यवस्था बेहतर।
  • ₹25 लाख आय, ₹4.5 लाख कटौती: नई व्यवस्था: ~₹3.20 लाख। पुरानी व्यवस्था: ~₹4.29 लाख। नई व्यवस्था ~₹1.09 लाख से बेहतर।
  • वरिष्ठ नागरिक (65 साल), ₹7 लाख आय, कोई कटौती नहीं: नई व्यवस्था: 0 (87A छूट)। पुरानी व्यवस्था: ~₹41.6 हज़ार (टैक्सेबल आय ₹6.5 लाख, जो ₹5 लाख की छूट सीमा से ज़्यादा है)। नई व्यवस्था बेहतर।

सामान्य नियम: FY 2025-26 के स्लैब में ज़्यादातर लोगों के लिए नई व्यवस्था सस्ती पड़ती है। पुरानी व्यवस्था तभी आगे निकलती है जब कटौतियाँ बहुत बड़ी हों, मोटे तौर पर ₹15 लाख आय पर ₹5.5 लाख+ और ₹25 लाख या ज़्यादा आय पर ₹8 लाख+।

टैक्स बचाने के टिप्स

  • सिर्फ आय देखकर व्यवस्था न चुनें, अपनी असली कटौतियों के साथ दोनों का हिसाब लगाएँ।
  • अगर होम लोन ब्याज, 80C निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस और HRA मिलाकर लगभग ₹5.5-8 लाख या उससे ज़्यादा हैं, तो पुरानी व्यवस्था जीत सकती है, दोनों जाँच लें।
  • बिना बड़े निवेश या होम लोन वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए नई व्यवस्था लगभग हमेशा बेहतर है।
  • सेक्शन 87A की छूट से कम आय पर दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स ज़ीरो हो जाता है (नई में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय, पुरानी में ₹5 लाख तक)।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन अपने आप मिलता है, अलग से क्लेम नहीं करना पड़ता: नई में ₹75 हज़ार, पुरानी में ₹50 हज़ार।
  • सैलरीड लोग हर साल व्यवस्था बदल सकते हैं। बिज़नेस आय वाले जीवन में सिर्फ एक बार वापस बदल सकते हैं।
  • पुरानी व्यवस्था में 80CCD(1B) के तहत NPS के ₹50 हज़ार न भूलें, यह 80C के ऊपर अतिरिक्त कटौती है।

सीमाएँ और ध्यान देने योग्य बातें

यह कैलकुलेटर सबसे आम स्थितियों को कवर करता है, लेकिन इसमें (1) कैपिटल गेन की विशेष टैक्स दरें, (2) बिज़नेस की प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन स्कीम, और (3) NRI टैक्स दरें शामिल नहीं हैं। ₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज और मार्जिनल रिलीफ (87A छूट और हर सरचार्ज सीमा पर) शामिल हैं; कटौतियाँ कानूनी सीमा तक सीमित हैं (80C ₹1.5 लाख, 80CCD(1B) ₹50,000, खुद रहने वाले घर का होम लोन ब्याज ₹2 लाख)। जटिल मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें। टैक्स नियम हर साल बदलते हैं, इसलिए incometax.gov.in पर नवीनतम जानकारी ज़रूर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे नई व्यवस्था चुननी चाहिए या पुरानी?

अपनी आय और कटौतियों के साथ दोनों का हिसाब लगाएँ और जिसमें कम टैक्स बने वही चुनें। FY 2025-26 के स्लैब में मोटा नियम: लगभग ₹12.75 लाख की सैलरी तक नई व्यवस्था में टैक्स ज़ीरो है, और इसके ऊपर भी आम तौर पर नई व्यवस्था बेहतर है, जब तक आपकी कटौतियाँ (होम लोन + 80C + 80D + HRA + NPS) बहुत बड़ी न हों, यानी ₹15 लाख आय पर ₹5.5 लाख+ और ₹25 लाख या ज़्यादा पर ₹8 लाख+। पक्का करने के लिए यह कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

स्टैंडर्ड डिडक्शन क्या है?

यह एक तय रकम है जो टैक्स निकालने से पहले सैलरी आय से अपने आप घटा दी जाती है। अभी नई व्यवस्था में ₹75,000 (FY 2024-25 से) और पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 है। आपको कुछ नहीं करना पड़ता, यह अपने आप लगता है।

सेक्शन 87A की छूट क्या है?

अगर आपकी टैक्सेबल आय एक तय सीमा से कम है, तो पूरी छूट मिलती है और टैक्स ज़ीरो हो जाता है। नई व्यवस्था: ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ज़ीरो टैक्स (₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद लगभग ₹12.75 लाख सैलरी), इसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ। पुरानी व्यवस्था: ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ज़ीरो टैक्स। सीमा से ऊपर सामान्य टैक्स लगता है।

क्या नई व्यवस्था में HRA क्लेम कर सकते हैं?

नहीं, HRA छूट सिर्फ पुरानी व्यवस्था में मिलती है। नई व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा लगभग कोई कटौती नहीं मिलती, इसीलिए उसके स्लैब कम रखे गए हैं।

80C क्या है और इससे कितना बचा सकते हैं?

सेक्शन 80C में कुछ खास निवेशों पर सालाना ₹1.5 लाख तक की कटौती मिलती है: PPF, ELSS म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा प्रीमियम, NSC, EPF, होम लोन का मूलधन और बच्चों की ट्यूशन फीस। टैक्स बचत = ₹1.5 लाख × आपकी स्लैब दर। यानी 20% स्लैब में आप ₹30,000 तक बचा सकते हैं।

क्या सरचार्ज भी लगता है?

हाँ, ऊँची आय पर। ₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज लगता है: ₹50 लाख-1 करोड़ पर टैक्स का 10%, 1-2 करोड़ पर 15%, 2-5 करोड़ पर 25%, और 5 करोड़ से ऊपर पुरानी व्यवस्था में 37% / नई व्यवस्था में 25%। नई व्यवस्था में अधिकतम सरचार्ज 25% तक सीमित है, जो बहुत ऊँची आय वालों के लिए बड़ा फर्क है।

क्या साल के बीच में व्यवस्था बदल सकते हैं?

नहीं, TDS के लिए बताई गई व्यवस्था पूरे वित्त वर्ष लागू रहती है। लेकिन सैलरीड कर्मचारी ITR भरते समय बेहतर विकल्प चुन सकते हैं। बिज़नेस आय वाले (सेक्शन 44AD / 44ADA) जीवन में सिर्फ एक बार बदल सकते हैं।

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